Wednesday, April 25, 2007

हम सब एक हैं... यही हमारी अभिव्यक्ति है...

लो हम आ गए..
खुद को बताने.. खुद को जताने...
खुद से बाते करने..खुद की बात करवाने...
खुद के बारे में सोंचने... खुद को अपने बारे में सोंचने पर मजबूर करने...
मजबूरी मर्जी की... मजबूरी खुशी की...
आखिर जरुरत ही है ऐसी मजबूरी की...
क्योंकि होने वाला ही है हमसे जमाना...
क्योंकि होने वाली ही है चर्चा हमारी...
आखिर हमसे ही हम हैं....
आखिर यही हमारी अभिव्यक्ति है....

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